Home > About Embassy > पेकिंग विश्वविद्यालय द्वारा "एशिया में हिंदी" शीर्षक पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मिशन प्रभारी प्रमुख श्री अमित नारंग का संदेश- 27 Oct 2017

माननीय अतिथिगण, वरिष्ठ अध्यापकगण,
सभा में एकत्रित सभी हिंदी प्रेमी तथा हिंदी के विद्यार्थीगण, और मेरे प्यारे मित्रों,

2. भाषा की कोई सीमा नहीं होती, उसके चाहने और पढ़ने वाले उस हर गाँव, हर शहर, हर देश में मिलते हैं जहाँ उसे फलने-फूलने का अवसर मिलता है, और यही एक कड़ी है जो समय के साथ उस भाषा के प्रशंसकों को एक साथ ला खड़ा करती है।आज पेकिंग विश्वविद्यालय के प्रांगण में हम सब एकत्रित हुए हैं,और मैं मानता हूँ के आज की ये संगोष्ठी हिंदी भाषा के पढ़ने और लिखने वालों के लिए ना केवल एक अनमोल अवसर है, बल्कि हिंदी भाषा में विश्व भर में लोगों की बढ़ती रुचि का एक महत्वपूर्ण सूचक भी है। मैं यहाँ बैठे तमाम अतिथिगण का अभिनंदन करता हुँ, मैं सर्वप्रथम प्रो.ज्यांग जिंगखुई का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ और उनके प्रति आभार प्रकट करता हूँ।हिंदी के प्रचार प्रसार में पेकिंग विश्वविद्यालय ने चीन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । इस कार्यक्रम में प्रो.ज्यांग जिंगखुई ने व्यक्तिगत तौर पे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसके लिए वह हमारे आभार के पात्र हैं, हमारी प्रशंसा के पात्र हैं। साथ-साथ चीन के विभिन्न प्रांतों से आए , विश्वविद्यालयों से आए सभी हिंदी प्रेमियों और दूसरे देशों से आए हिंदी प्रेमी मित्रों का भी मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। सबसे महत्वपूर्ण मैं अभिनंदन करता हूँ हिंदी के युवा विद्यार्थियों का, मेरा मानना है कि हिंदी का प्रेम आपको भारत-चीन मैत्री और भारत-चीन आपसी भाईचारे का उन्नत सूत्र बनाएगा-ऐसी मेरी आशा है, ऐसी मेरी शुभकामना है।

3. हिंदी प्रेम की भाषा है, हिंदी संवाद की भाषा है, हिंदी मैत्री की भाषा है। हिंदी ने भारत को पूर्वी एशियाई देशों से सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज चीन में १५ विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। अनेक हिंदी रचनाओं और पुस्तकों का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ है, और ये काम अभी भी जारी है, उसी प्रकार चीनी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद भी लगातार प्रगति पे है। चीनी भाषा की महान रचना- JOURNEY TO THE WEST ( Xiyou Ji) (पश्चिम की यात्रा) का हिंदी संस्करण, २००९ में प्रकाशित की गयी थी।

4. साथ ही साथ हिंदी पढ़ने के लिए हर साल चीनी छात्र-छात्राएँ भारत जाते हैं, और यह बहुत हर्ष की बात है कि हमारे चीनी मित्रों का हिंदी पठन-पाठन में रुचि दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। १९५० और १९६० के दशक में, पेकिंग विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा, संस्कृत और पाली की पढ़ाई करने वाले छात्रों को स्वीकार करना शुरू किया । वर्ष १९५९ में बीजिंग प्रसारण संस्थान (चीन का वर्तमान संचार विश्वविद्यालय) स्थापित किया गया, जहाँ धीरे-धीरे तमिल, बांग्ला, हिन्दी आदि भारतीय भाषाओं को पढ़ाया जाने लगा।

5. २१ वीं सदी में, चीनी विश्वविद्यालों में भारत पे अध्ययन और तेजी से विकसित हुआ। बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी ने वर्ष २००६ में हिंदी कोर्स की स्थापना की । शीआन इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी ने भी २००६ में हिंदी कोर्स शुरू किया। युन्नान मिंजु यूनिवर्सिटी (कुनमिंग), गुआंग्डोंग यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज और शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी ने वर्ष २०११ में हिंदी के प्रमुख कोर्स खोले ।

6. १९५० से लेके अब तक, दोनों देशों के हिंदी भाषा विद्वानों के बीच आदान-प्रदान ने हिंदी के प्रचार- प्रसार में महतपूर्ण भूमिका निभायी है। आजका यह कार्यक्रम इस आदान-प्रदान को और बढ़ाने में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है।

7. कुछ अरसे पहले भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर दिए संदेश में सभी हिंदी प्रेमियों और हिंदी भाषियों को बधाई दी, और यह आशा प्रकट की है कि हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों में और तेज़ी आएगी। आजका यह सम्मेलन विश्वभर में हिंदी की लोकप्रियता को और बढ़ावा देगा।

8. मैं एक बार फिर भारतीय राजदूतावास की ओर से प्रो.ज्यांग जिंगखुई का, समस्त आयोजकों का, तथा यहाँ उपस्थित अध्यपकगण और विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ और इस सम्मेलन की सम्पूर्ण सफलता की कामना करता हूँ।

9. अंत में मैं कवि शम्भूनाथ तिवारी के इन शब्दों से हिंदी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करना चाहूँगा-

"बने विश्व की भाषा हिंदी, हम सब की अभिलाषा हिंदी
अन्य सभी चर्चित भाषाओं, सा ही प्यार-दुलार मिले,
विश्वपटल पर हिंदी को भी, न्यायोचित अधिकार मिले।
पूरे हों संकल्प सभी के,जन-गण-मन-अभिलाषा हिंदी।
बने विश्व की भाषा हिंदी, हम सब की अभिलाषा हिंदी।"

- बहुत-बहुत धन्यवाद-