Home > राजदूत महोदय का “भारत-चीन मैत्री में हिंदी का योगदान” समारोह के अवसर पर स्वागत भाषण; 23 अप्रैल 2018, बेइजिंग

राजदूत महोदय का “भारत-चीन मैत्री में हिंदी का योगदान” समारोह के अवसर पर स्वागत भाषण; 23 अप्रैल 2018, बेइजिंग

माननीया विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी,

विदेश मंत्रालय की सचिव महोदया श्रीमती. रुचि घनश्याम जी

पेकिंग विश्वविद्यालय के प्रोफ. जिआंग जिंगखुई जी

वांग शुयिंग महोदय,

छन लिषिंग महोदय,

और मेरे हिंदी भाषी मित्रों

मैं, आज के इस विशेष समारोह "भारत-चीन मैत्री में हिंदी का योगदान" में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत करता हूँ।

2. यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है की भारत की माननीया विदेश मंत्री जी ने इस समारोह में आ कर इसकी गरिमा को बढ़ाया है। जैसा की आप सभी जानते हैं माननीया मंत्री जी हिंदी की प्रबल समर्थक हैं, इन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिंदी में भाषण दिया है। बेइजिंग स्थित भारतीय राजदूतावास ने आज के इस समारोह का आयोजन इसी उद्देश्य से किया है की माननीया मंत्रीजी स्वयं चीन के लोगों का हिंदी प्रेम अनुभव कर सकें।

3. यह एक सार्वभौमिक सत्य है की किसी दूसरी संस्कृति और उसके लोगों को समझने में भाषा का बहुत बड़ा योगदान होता है। राष्ट्रों की बीच मैत्री तथा आपसी समझ बढ़ाने में भाषा की एक अहम भूमिका होती है। भारत चीन जैसी दो प्राचीन सभ्यताओं की लिए ये बात विशेष रूप से सत्य है। हम एक दूसरे से सदियों से परिचित हैं, और प्राचीन काल से ही हम दोनों देशों के यात्री एक दूसरे की भाषा सिखाते और सिखते आये हैं। 21 वीं सदी में इसका विशेष महत्व है। हमें एक दूसरे की भाषा बोलने वालों की संख्या में बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है। ये भारत-चीन के संबंधों को और भी मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

4. हिंदी भाषा, विश्व में सर्वाधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। विश्व में भारत के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण हिंदी भाषा में लोगों की रुचि भी बड़ी है। यहाँ चीन में, पेकिंग विश्वविद्यालय में 1917 में ही हिंदी विषय पर अध्यापन आरम्भ हो गया था।

5. आज हिंदी, चीन के विभिन्न क्षेत्रों के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालओं में पढ़ाई जा रही है। तेजी से बढ़ते भारत तथा उतनी ही तेजी से बढ़ाते भारत-चीन व्यापार संबंधों के कारण चीन के युवाओं में हिंदी सीखने के प्रति उत्सुकता बढ़ी है क्योंकि वो आज इसमें अपना उज्ज्वल भविष्य देखते हैं। भारत ने भी चीन में पेकिंग विश्वविद्यालय सहित, चार विश्वविद्यालयों में "हिंदी चेयर" की स्थापना की है, जिसमें शेनजेन विश्वविद्यालय सबसे नया है। मैं इस मंच से चीन में हिंदी के प्रचार और प्रसार में संलग्न चीनी विद्वानों द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की प्रशंसा करना चाहूंगा।

6. भारत सरकार ने हिंदी के अंतरराष्ट्रीयकरण तथा चीन में इसके प्रसार के लिए कई कदम उठाये हैं। हमारी मुख्य अतिथि माननीय विदेश मंत्रीजी ने स्वयं इसके लिए बहुत प्रयत्न किये हैं ।

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